CEC ज्ञानेश कुमार विवाद में ममता बनर्जी का तीखा हमला, जेपी नड्डा का पलटवार: 'संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहा विपक्ष'
नई दिल्ली (J Janmat News Desk):
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में घमासान तेज हो गया है। चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी हालिया खबरों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए करारा पलटवार किया है।
■ ममता बनर्जी के तीखे आरोप:
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संस्था का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा:
1. चुनाव तंत्र में निष्पक्षता के अभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने और कानूनी जवाबदेही तय करने की मांग की।
2. पश्चिम बंगाल में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की बात दोहराते हुए उन्होंने 'इंडिया' गठबंधन के दलों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।
3. विपक्षी नेताओं का दावा है कि आयोग में लिए जाने वाले फैसलों और कार्यशैली में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अनदेखी की जा रही है।
■ जेपी नड्डा का पलटवार: 'झूठ सच नहीं बनता'
विपक्ष के इन हमलों का कड़ा जवाब देते हुए भाजपा नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर देश की संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं को बदनाम करने की 'टूलकिट मानसिकता' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
1. "झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता।" विपक्ष के पास कोई ठोस विजन नहीं है और वह चुनावी हार की हताशा में संस्थाओं की साख गिराने में जुटा है।
2. राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता सिर्फ सत्ता पाने के लिए देश के लोकतांत्रिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
3. चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और मजबूत संवैधानिक संस्था है और जनता विपक्ष की इस 'नकारात्मक राजनीति' को पहले भी खारिज कर चुकी है।
■ चुनाव आयोग की स्थिति:
निर्वाचन आयोग की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव सुधारों से जुड़े सभी निर्णय पूरी तरह विधिक और सामूहिक सहमति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार आंतरिक विचार-विमर्श संस्थागत सुधारों का स्वाभाविक हिस्सा है, जिसे अनावश्यक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
■ जे जनमत का दृष्टिकोण:
चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा किसी भी देश की रीढ़ होती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में निर्वाचन आयोग की साख और पारदर्शिता को अक्षुण्ण बनाए रखना ही लोकतंत्र के हित में है।
(J Janmat News — निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता)


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