मुंबई / नई दिल्ली:


त्योहारी सीजन के ठीक बीच आम जनता और नौकरीपेशा वर्ग को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से बड़ा झटका लगा है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी समीक्षा बैठक में पॉलिसी रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब देश में प्रमुख नीतिगत रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% पर पहुंच गया है। 


सीधे आपकी जेब पर असर—होम, कार और पर्सनल लोन होंगे महंगे:

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। इसमें इजाफा होने का सीधा असर यह होगा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), HDFC बैंक, ICICI बैंक और पंजाब नेशनल बैंक समेत सभी प्रमुख सरकारी और निजी बैंक अपनी बेंचमार्क लेंडिंग दरों (EBLR/MCLR) में तुरंत बढ़ोतरी करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वाले करोड़ों ग्राहकों की मासिक ईएमआई (EMI) में इजाफा होना तय है।


आरबीआई ने क्यों उठाया सख्त कदम?

रिजर्व बैंक के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी और घरेलू बाजार में खाद्य महंगाई के जोखिम को काबू में रखने के लिए यह सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया था। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति (CPI Inflation) को निर्धारित लक्ष्य के भीतर रखने के लिए मौद्रिक रुख को कड़ा किया है, ताकि अर्थव्यवस्था में अनियंत्रित महंगाई को रोका जा सके।


फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) धारकों को मिलेगा फायदा:

जहां एक तरफ कर्जदारों के लिए ईएमआई का बोझ बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग्स कराने वाले वरिष्ठ नागरिकों और आम निवेशकों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक अपनी एफडी ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिससे बचत पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ेगा।


रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में सुस्ती की आशंका:

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि लोन महंगा होने से त्योहारी सीजन में घरों और चार पहिया वाहनों की मांग पर हल्का असर पड़ सकता है। मध्यम वर्ग के परिवारों का मासिक बजट इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होगा।


जे जनमत बिजनेस डेस्क:

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