नई दिल्ली:
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर संसद से लेकर सड़क तक मचे घमासान के बीच विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने एक बड़ा कदम उठाया है। राहुल गांधी ने देश भर में लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को एकजुट करने के मकसद से 'सत्याग्रह' (Satyagraha) नामक एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
क्या है 'सत्याग्रह' डिजिटल प्लेटफॉर्म?
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और कस्बों में चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों, छात्र आंदोलनों और नागरिक समाज के प्रतिरोध को रियल-टाइम मैप करना है। इस पोर्टल के जरिए आम नागरिक, छात्र संगठन और विपक्षी दल एक साथ जुड़कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रूपरेखा, जानकारी और जमीनी रिपोर्ट साझा कर सकेंगे।
सड़क पर टकराव, डिजिटल मोर्चे पर तैयारी:
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं और पुलिस लगातार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले रही है। राहुल गांधी ने लॉन्च के दौरान कहा कि जब सरकार और संवैधानिक संस्थाएं सड़कों पर उठने वाली जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करती हैं, तब अहिंसक सत्याग्रह को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाना जरूरी हो जाता है। उन्होंने जनता से इस मंच से जुड़ने की अपील की।
विपक्ष हुआ लामबंद:
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चुनावों पर उठाए गए तीखे सवालों के बाद राहुल गांधी के इस नए डिजिटल दांव ने सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संविधान और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बचाने का जनांदोलन है।
जे जनमत ग्राउंड डेस्क की रिपोर्ट:
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