नई दिल्ली:


मतदाता सूची से मनमाने तरीके से नाम हटाने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर देशभर में छिड़े भारी राजनीतिक व न्यायिक घमासान के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 अक्टूबर को जारी किए गए सख्त दिशा-निर्देशों के ठीक 24 घंटे बाद, शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को आयोग ने देशभर में मतदाता सूची से नाम विलोपित (Deletion) करने की सभी कार्यवाहियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।


सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आपात निर्देश:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों की आपात बैठक के बाद निर्वाचन सदन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को एक औपचारिक पत्र भेजा है। निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार डोर-टू-डोर 'फिजिकल वेरिफिकेशन' और अनिवार्य 15-दिवसीय व्यक्तिगत लिखित नोटिस देने की नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी विधानसभा क्षेत्र में नाम विलोपन की कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन:

कल शीर्ष अदालत ने साफ कहा था कि किसी भी नागरिक का वोट का अधिकार मनमाने तरीके से या सिर्फ सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम के आधार पर नहीं छीना जा सकता। अदालत ने आयोग को चेतावनी दी थी कि बिना भौतिक सत्यापन और सार्वजनिक डैशबोर्ड बनाए नाम हटाना असंवैधानिक माना जाएगा। चुनाव आयोग ने अपने नए आदेश में स्वीकार किया है कि वह न्यायपालिका के दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए पूरे डिजिटल और प्रशासनिक तंत्र को फिर से तैयार कर रहा है।


विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया—'जनता के सत्याग्रह की जीत':

संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकालने वाले विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आयोग के इस कदम को जनता के अधिकार और विपक्ष के सत्याग्रह की पहली बड़ी जीत बताया है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि सड़क से अदालत तक लड़ी गई लड़ाई ने चुनाव आयोग को अपनी मनमानी रोकने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन आयोग के शीर्ष स्तर पर निष्पक्षता सुनिश्चित होने तक निगरानी जारी रहेगी।


क्या होगा आम मतदाताओं पर असर?

इस रोक के बाद जिन नागरिकों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 या रिवीजन के तहत नोटिस प्रक्रिया में थे, वे सभी मामले फिलहाल फ्रीज हो गए हैं। आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग को अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी कि नया सत्यापन तंत्र कैसे काम करेगा।


जे जनमत पॉलिटिकल व लीगल डेस्क:

'जे जनमत न्यूज़' (J Janmat News) भारतीय लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के हर बड़े फैसले पर सबसे निष्पक्ष और विस्तृत विश्लेषण सामने लाता है। चुनाव आयोग विवाद के हर आगामी कानूनी मोड़ के लिए विजिट करते रहें

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